सुप्रीम कोर्ट का लैंडमार्क जजमेंट: समय सीमा वर्जित वाद सुनवाई योग्य नहीं
सुप्रीम कोर्ट का लैंडमार्क जजमेंट: समय सीमा वर्जित वाद सुनवाई योग्य नहीं 20 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के 26 अप्रैल, 2016 के आदेश को रद्द करते हुए न्यायिक प्रक्रियाओं में Order VII Rule 11 CPC की सटीकता और प्रभावशीलता को पुनर्स्थापित किया। इस निर्णय में न्यायालय ने यह रेखांकित किया कि यदि कोई वाद परिसीमा (limitation) से स्पष्ट रूप से बाधित हो, तो उसे खारिज करना न्यायिक समय और संसाधनों का उचित उपयोग है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने इस निर्णय में गहन कानूनी विवेचना प्रस्तुत की। इस निर्णय ने प्रक्रिया के दुरुपयोग की रोकथाम हेतु Order VII Rule 11 CPC के महत्व को और अधिक प्रखर रूप में प्रस्तुत किया। विवाद का पृष्ठभूमि और तात्कालिकता इस मामले में प्रतिवादी नंबर 1 ने अपने दावे में यह उल्लेख किया कि वह भोंसले राजवंश से छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रत्यक्ष वंशज हैं और महाराष्ट्र में विरासत में मिली व्यापक भूमि संपत्तियों पर स्वामित्व का दावा किया। उन्होंने संपत्तियों के स्वामित्व और कब्जे की पुष्टि के लिए एक विशेष सिविल मुकदमा दायर किया। वादी न...