सुप्रीम कोर्ट ने उठाई चुनाव आयोग पर सवाल

साथियों आज हमारे देश में पारदर्शी चुनाव कराने के लिए सरकार को वह चुनाव आयोग को कड़ा से कड़ा निर्णय लेना होगा आज का चुनाव कतई पारदर्शी नहीं है हमें अगर देश के लोकतंत्र को बचाना है और मजबूत बनाना है तो हमें निश्चित रूप से चुनाव को और अधिक पारदर्शी बनाना होगा।
क्या करने होंगे उपाय
   साथियों चुनाव प्रचार के समय हमें एवं चुनाव आयोग को कड़ा निर्देशों का पालन कराना होगा जिसने किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति जैसे प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री राज्यपाल या या मंत्रिमंडल का कोई सदस्य सांसद विधायक किसी भी चुनाव प्रचार में भाग नहीं लेंगे क्योंकि सरकार किसी एक पार्टी या एक दल या किसी विशेष व्यक्ति की नहीं होती जो भी सरकार बनती है वह पूरे देश के लिए पूरे राज्य के लिए होती है तो मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री के द्वारा किया गया चुनाव प्रचार निश्चित रूप से सवालों के घेरे में है क्या इससे पद पर बैठा व्यक्ति जो देश के लिए देश का नेतृत्व करता हो और प्रधान सेवक या प्रधानमंत्री जैसे पद से सुशोभित होता हो उसके द्वारा किसी विशेष पार्टी संगठन का प्रचार प्रसार करना कतई जायज नहीं है और इससे पारदर्शी चुनाव कदापि नहीं कराए जा सकते
चुनाव आयोग को लेना होगा कड़ा निर्णय
     साथियों इस संबंध में मेरा कहना है कि चुनाव आयोग को इस संबंध में तत्काल बंदी से लागू लागू कर देनी चाहिए ताकि कोई भी व्यक्ति जो संवैधानिक पद पर बैठा हो लोकसभा राज्यसभा या विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य हो किसी भी चुनाव प्रचार में भाग नहीं लेगा तभी हमारे देश का लोकतंत्र मजबूत होगा।

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